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Touch Screen Kya hai? | Touch Screen का इतिहास

अगर आपके पास एक ( मोबाइले फोने / Smartphone ) है तो आपका आप टच स्क्रीन से तो परिचित होंगे ही.

आज इस पोस्ट में हम इसी टच स्क्रीन के इतिहास के बारे में जानकारी देंगे, और साथ ही टच स्क्रीन के कितने प्रकार है. इस के बारे में भी जानकारी देंगे.

Touch Screen का इतिहास.

1965 में E.A Johnson ने सबसे पहली टच स्क्रीन( Touch Screen ) बनाई थी, लेकिन ये एक बार में सिर्फ एक टच ( Touch ) को ही प्रोसेस कर पाता था. आज के समय में ये Technology बोहोत ही बुनयादी लगती लेकिन ये Technology उस समय के लिए कुछ अलग थी.

E.A Johnson ने ये टच स्क्रीन ( Touch Screen ) Technology सब से पहले बनाई थी लेकिन 1970 तक इस Technology को लोकप्रियता नहीं मिली थी.

इसके बाद Resistive Touchscreen का आविष्कार Dr. G. Samuel Hurst द्वारा किया गया. इसी अविष्कार के बाद ( Touch Screen ) Technology को लोकप्रियता मिलना हासिल हुई.

इस के बाद University of Toronto ने पहला Multi Touch डिस्प्ले का आविष्कार 1982 किया. इसके बाद भी Touch Screen के मोबाइल बनना शुरू नहीं हुए थे.

पहला Touch Screen मोबाइल फ़ोन 1992 में IBM द्वारा बनाया गया था. जिस का नाम था IBM Simon.

IBM Simon first touch screen mobile

Types Of Touch Screen ?

  1. Resistive Touchscreen
  2. Capacitive Touchscreen
  3. SAW (Surface Acoustic Wave) Touch Screen
  4. Infrared Touchscreen
  5. Optical Imaging Touchscreen
  6. Acoustic Pulse Recognition Touchscreen

इन में से सब से ज्यादा हम दैनिक जीवन में 2 तरह की Touch Screen इस्तेमाल करते है.

जिस में 1) Resistive Touchscreen और 2)Capacitive Touchscreen इन दो Touchscreen के बारे में जानकारी देंगे.

1) Resistive Touchscreen

Resistive Touchscreen सब से सरल होती और इस तरह के Touch Screen अधिकतर प्रयोग होते है.

अगर अपने कभी ATM से पैसे निकले होंगे, तो आप ने जो ATM स्क्रीन देखी होगी वो एक Resistive Touchscreen होती है.

Resistive Touchscreen दो परतों से मिल कर बनी होती है जो के बिजली का संचाकन कर सकती हो यानी दो ( Layers ) से मिल कर बनी होती है.

जिस में से एक परत ( Layer ) Conductive होती है और दूसरी परत Resistive होती है, और इन दो परतों के बीच Spacersलगे होते है. जिस की मदद से ये दो Layers Separate रहती है यानी अलग रहती है.

How Resistive Touchscreen Work ?

जैसे के हमने ऊपर जाना Resistive Touchscreen दो परतों से मिल कर बनी होती है. in दोनों परतों में निरंतर बिजली का संचाकन होता रहता है.

जब आप इस तरह की स्क्रीन को टच करते है तब ये दो परत ( Layers ) आपस में संपर्क में आती है, जिस की वजह से अपने जहाँ क्लिक ( Click ) किया होता है वहां के बिजली के प्रवाह में बदलाव आता है . ये बदलाव उपकरण में लगा सॉफ्टवेर ( Software ) Detect करता है, और आपने ने जहां क्लिक किया है वो काम हो जाता है.

अब जानते है इस तरह की Touchscreen के फायदे और नुक्सान क्या है .

Cons :-

1.लेकिन इस स्क्रीन का एक Downside भी है. जैसे के अपने जाना ये स्क्रीन कई परतों से मिल कर बनी हुई है, जिस की वजह से इस स्क्रीन पर कुछ लिखा हुआ पढ़ पाना बोहोत मुश्किल होता है.

2.Resistive Touchscreen एक बार में सिर्फ एक ही टच को रजिस्टर करता है .

Pros :-

1.लिकिन इस तरह के एक फ़ायदा भी है Resistive Touchscreen विश्वसनीय और टिकाऊ होती जिस की वजह से इस तरह की Touchscreen ATM मशीनों और पॉइंट ऑफ़ सेल पॉइंट्स पर लगी होती है.

1) Capacitive Touchscreen

Capacitive Touchscreen Resistive Touchscreen से अलग होती है. येअपने बिजली के प्रवाह में परिवर्तित करती है जब ये स्क्रीन बिजलीआवेश रखने वाली किसी चीज के संपर्क में आता है। (anything that holds an electrical charge ).

Touchscreen indium tin oxide या फिर Copper बनी होती है .

Cons :-

1.आप ये टच स्क्रीन ग्लव्स ( Gloves ) के साथ इस्तेमाल नहीं कर सकते.

Pros :-

1.ये Touchscreen Multi-Touch को Support करती है.

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